हम इन कैंसर का इलाज करते हैं
सभी प्रकार के कैंसर और ब्लड कैंसर का इलाज – निदान, कीमोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और दूसरी राय; सर्जन व रेडिएशन विशेषज्ञों के साथ समन्वय।
स्तन कैंसर
स्तन में गांठ, आकार या त्वचा में बदलाव, निप्पल से स्राव – ऐसे लक्षण हों तो तुरंत जांच कराएं। जल्दी पता चलने पर स्तन कैंसर ज़्यादातर पूरी तरह ठीक हो सकता है।
फेफड़ों का कैंसर
दो हफ्ते से ज़्यादा खांसी, खांसी में खून, सांस फूलना, वज़न घटना – इन लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें। आज कई मरीजों को गोलियों के रूप में टार्गेटेड थेरेपी दी जा सकती है।
ब्लड कैंसर
ल्यूकेमिया, लिम्फोमा और मायलोमा खून के कैंसर हैं। लगातार बुखार, कमज़ोरी, शरीर पर नीले निशान, गांठें या हड्डियों में दर्द हो तो रक्त रोग विशेषज्ञ से मिलें। कई ब्लड कैंसर इलाज से ठीक हो जाते हैं।
मुंह, गले व गर्दन का कैंसर
तंबाकू, गुटखा और धूम्रपान से मुंह का कैंसर बहुत आम है। मुंह में न भरने वाला छाला, सफेद/लाल दाग, मुंह कम खुलना या गर्दन में गांठ हो तो तुरंत दिखाएं।
ब्रेन ट्यूमर
लगातार बढ़ता सिरदर्द, दौरे, उल्टी, देखने या बोलने में बदलाव ब्रेन ट्यूमर के लक्षण हो सकते हैं। सर्जरी और रेडिएशन के बाद कीमोथेरेपी हमारे यहां दी जाती है।
किडनी कैंसर
पेशाब में खून, कमर के बगल में दर्द या गांठ किडनी कैंसर के लक्षण हैं। अक्सर सोनोग्राफी में संयोग से पता चलता है। एडवांस बीमारी में टार्गेटेड थेरेपी व इम्यूनोथेरेपी मददगार है।
पेट, आंत, लिवर व पित्ताशय का कैंसर
निगलने में तकलीफ, लगातार अपच, उल्टी या मल में खून, पीलिया, वज़न घटना – ये पेट के कैंसर के लक्षण हो सकते हैं।
गर्भाशय, बच्चेदानी के मुंह व अंडाशय का कैंसर
मासिक धर्म बंद होने के बाद खून आना, संबंध के बाद खून आना, बदबूदार स्राव, पेट फूलना – इन्हें नज़रअंदाज़ न करें। पैप स्मीयर और HPV टीका बचाव करते हैं।
प्रोस्टेट, मूत्राशय व अंडकोष का कैंसर
पेशाब में खून, बार-बार पेशाब, धार कमज़ोर होना, हड्डियों में दर्द या अंडकोष में गांठ हो तो जांच कराएं। अंडकोष का कैंसर युवाओं में होता है और ज़्यादातर ठीक हो जाता है।
हड्डी व मांसपेशियों का कैंसर (सार्कोमा)
हाथ-पैर में बढ़ती गांठ, रात में बढ़ने वाला हड्डी का दर्द या सूजन – खासकर बच्चों और युवाओं में – नज़रअंदाज़ न करें।
लिम्फोमा
गर्दन, बगल या जांघ में बिना दर्द की गांठें, बुखार, रात में पसीना और वज़न घटना लिम्फोमा के लक्षण हैं। ज़्यादातर लिम्फोमा इलाज से ठीक हो जाते हैं।
मल्टीपल मायलोमा
कमर दर्द, हड्डियों में दर्द, आसानी से हड्डी टूटना, खून की कमी, किडनी की समस्या – खासकर 50 वर्ष से ऊपर – मायलोमा का लक्षण हो सकता है।
अज्ञात मूल स्थान वाला कैंसर
कभी कैंसर शरीर में फैला मिलता है लेकिन कहां से शुरू हुआ पता नहीं चलता। सही बायोप्सी जांच, PET-CT और विशेषज्ञ चर्चा से सही इलाज तय किया जा सकता है।
डेस्मॉइड ट्यूमर (फाइब्रोमेटोसिस)
डेस्मॉइड ट्यूमर शरीर में फैलता नहीं, पर आसपास बढ़ता है। कई बार तुरंत सर्जरी के बजाय निगरानी या दवा बेहतर होती है।
एमिलॉयडोसिस
एमिलॉयडोसिस में असामान्य प्रोटीन दिल, किडनी और नसों में जमा हो जाता है। पैरों में सूजन, पेशाब में झाग, सांस फूलना, हाथ-पैर में झनझनाहट इसके लक्षण हैं।
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कीमोथेरेपी के दौरान बुखार, रक्तस्राव, सांस फूलना या भ्रम हो तो तुरंत नज़दीकी इमरजेंसी में जाएं। हमारी भर्ती और आपात सेवाएं मेडिकवर हॉस्पिटल, छत्रपति संभाजीनगर में होती हैं।